New Delhi : लोकसभा में बुधवार को 12 घंटे की चर्चा के बाद वक्फ संशोधन बिल पास हो गया. रात 2 बजे हुई वोटिंग में 520 सांसदों ने भाग लिया. 288 ने पक्ष में और 232 ने विपक्ष में वोट डाले.
वक्फ बिल पर मोदी सरकार को जिसकी उम्मीद थी, वह पहला काम पूरा हो गया. जी हां, विपक्ष के विरोध के बावजूद लोकसभा से वक्फ संशोधन बिल आसानी से पास हो गया. वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में 10 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई. लोकसभा में बुधवार को 12 बजे किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन बिल पेश किया था. 10 घंटे की चर्चा के बाद रात दो बजे वक्फ बिल को लोकसभा से पारित कर दिया गया. वक्फ बिल का पूरा नाम है वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक 2024. वक्फ बिल लोकसभा से तो पास हो गया, अब सरकार को राज्यसभा से आस है.
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को विधेयक सदन में पेश किया और चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि यह मुस्लिम समुदाय के हित में है. वक्फ विधेयक को 288 के मुकाबले 232 मतों से सदन की मंजूरी मिल गई. इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने के लिए सदन की बैठक रात लगभग दो बजे तक चली. इसके अलावा मुसलमान वक्फ अधिनियम 1923 का निरसन करने वाला मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 भी सदन में ध्वनि मत से पारित हो गया.
लोकसभा में किसके पक्ष में कितने वोट?
चर्चा के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पर विचार के लिए जब किरेन रिजिजू ने प्रस्ताव रखा तो विपक्ष के कुछ सदस्यों ने मत विभाजन की मांग की. इसके पक्ष में 288 और विरोध में 232 मत पड़े. हालांकि, लॉबी क्लीयर करने के बाद कई सदस्यों को सदन में दाखिल होने देने को लेकर विवाद भी हुआ. विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों का जवाब देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि नए संसद भवन में शौचालय की व्यवस्था लॉबी में ही की गई है और सिर्फ लॉबी से ही सदस्यों को अंदर आने दिया गया है. किसी को भी बाहर से आने की अनुमति नहीं दी गई है. जिस समय विधेयक पर मतदान हो रहा था, सदन के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लोकसभा में मौजूद नहीं थे.
लोकसभा में किसके पास कितना संख्या बल था?
वक्फ (संशोधन) विधेयक को पास कराने के लिए लोकसभा में बहुमत के लिए 272 सांसदों की जरूरत थी. यह संख्या मोदी सरकार के पास थी. बीजेपी के पास 240 सांसद हैं और सहयोगी दलों (जैसे जेडीयू, टीडीपी, एलजेपी, और अन्य) को मिलाकर कुल 293 सांसद हैं. इस तरह से एनडीए के पास लोकसभा में बहुमत से 21 अधिक संख्या थी. इस तरह लोकसभा से यह बिल आसानी से पास हो गया.
राज्यसभा में असली परीक्षा?
मोदी सरकार की वक्फ बिल पर असली परीक्षा राज्यसभा में होगी. यहां पास कराना इतना आसान नहीं होगा. कारण कि मोदी सरकार के पास राज्यसभा में स्पष्ट बहुमत नहीं है. राज्यसभा की कुल 245 सीटें हैं, जिनमें से 237 प्रभावी हैं. 8 सीट अभी खाली है. बहुमत के लिए 119 सांसदों की जरूरत है. एनडीए के पास राज्यसभा में अभी 112 सांसद हैं. ऐसे में उसे मनोनीत और निर्दलीय का सहारा लेना होगा. राज्यसभा एनडीए बीजेपी (96), सहयोगी दल (16), और 6 मनोनीत और 1 निर्दलीय के समर्थन से कुल 119 के नंबर तक पहुंचता है जो बहुमत के लिए जरूरी है. विपक्ष (इंडिया ब्लॉक) के पास 85 सांसद हैं. कांग्रेस (27), टीएमसी (13), सपा (10), डीएमके (10), अन्य (25)…जो बहुमत से 34 कम है. हालांकि, तुलना करके देखें तो विपक्ष के मुकाबले राज्यसभा में भी एनडीए की स्थिति मजबूत है. यह मजबूती वक्फ बिल को पास कराने में सक्षम है. अगर कुछ नया खेल नहीं होता है तो राज्यसभा से भी वक्फ बिल पर मुहर लग सकती है.
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