Johar live desk: केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि भारत 2030 तक इलेक्ट्रॉनिक वाहन (EV) उत्पादन में दुनिया का अग्रणी देश बन जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता को आर्थिक बोझ बताया और कहा कि ईंधन आयात पर प्रतिवर्ष 22 लाख करोड़ रुपये का खर्च आता है।
गडकरी ने कहा कि जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता एक आर्थिक बोझ है। उन्होंने कहा कि ईंधन आयात पर प्रतिवर्ष 22 लाख करोड़ रुपये का खर्च आता है, जो देश की अर्थव्यवस्था पर एक बड़ा बोझ है।
गडकरी ने यह भी कहा कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में भारत जापान से भी आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है।
गडकरी ने लिथियम आयन बैट्री की कीमतों में कमी आने की बात भी कही, जो इलेक्ट्रॉनिक वाहनों में प्रयोग की जाती हैं। उन्होंने कहा कि लिथियम आयन बैट्री की कीमतों में कमी आने से इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की कीमतें भी कम होंगी, जिससे लोगों के लिए ये वाहन अधिक सुलभ होंगे।
गडकरी ने कहा कि प्रदूषण को कम करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का उपयोग करके हम प्रदूषण को कम कर सकते हैं और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दे सकते हैं।
केंद्र सरकार अब पेट्रोल-डीजल वाले वाहनों के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रदूषण को कम करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
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