Bokaro : बोकारो स्टील प्लांट में अप्रेंटिस प्रशिक्षण प्राप्त विस्थापितों की मौत के बाद विस्थापितों का आक्रोश फूट पड़ा. गुरुवार को प्रेम महतो की मौत के बाद विस्थापितों ने बोकारो के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन किया. प्रेम महतो की मौत को लेकर विस्थापितों ने इसे प्रशासन की लापरवाही का परिणाम बताते हुए दोषी अधिकारियों और जवानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. इसके लिए उन्होंने आज यानी चार अप्रैल को बोकारो बंद का आह्वान किया है.
विस्थापितों ने इस्पात भवन गेट के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें उनका मुख्य आरोप यह था कि अप्रेंटिस के प्रशिक्षण में विस्थापितों को सीधे नियोजन की व्यवस्था नहीं की गई. इस प्रदर्शन के दौरान विस्थापितों ने बोकारो जनरल हॉस्पिटल को जाम कर दिया और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि दोषी अधिकारियों और CISF जवानों को सस्पेंड नहीं किया गया, तो बोकारो स्टील लिमिटेड (BSL) का उत्पादन ठप कर दिया जाएगा. प्रेम महतो की मौत के बाद स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई, और विस्थापितों ने सिटी सेंटर सहित अन्य प्रमुख क्षेत्रों में दुकानों को बंद करवा दिया.
सड़क जाम और बोकारो बंद का आह्वान
विस्थापितों के विरोध में आजसू, भाजपा और अन्य विस्थापित संगठनों ने आज बोकारो बंद का आह्वान किया है. बोकारो की विधायक श्वेता सिंह ने भी इसका समर्थन किया है. इस दौरान विस्थापितों ने तुपकाडीह में भी सड़क जाम किया और फुसरो-जैनामोड़ मुख्य सड़क को बंद कर दिया. उनका आरोप है कि बीएसएल प्रबंधन के आदेश पर सीआइएसएफ द्वारा बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया, जिससे कई युवा घायल हुए और प्रेम महतो की मौत हो गई.
टीना सिंह, वकील अग्रवाल और निवारण दिगार जैसे विस्थापित नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की. जरीडीह थाना प्रभारी कुमार विक्रम सिंह ने विस्थापितों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए मामले की गंभीरता बढ़ गई है. विस्थापितों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे थे, लेकिन प्रशासन की लापरवाही और पुलिस कार्रवाई ने उन्हें और उकसाया. अब तक, यह मामला बोकारो जिले में सबसे बड़े विवादों में से एक बन चुका है, और स्थिति के और बिगड़ने की आशंका है.
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