Allahabad : नोट बरामदगी के मामले के बाद चर्चा में आए न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने आज इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के तौर पर शपथ ली. हालांकि उन्हें तब तक कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा जाएगा जब तक उनके खिलाफ चल रही जांच पूरी नहीं हो जाती है. शपथ ग्रहण के बाद, न्यायमूर्ति वर्मा का नाम हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की वरिष्ठता सूची में शामिल कर लिया गया है, जिसमें उनका नाम नौवें स्थान पर है. शपथ ग्रहण समारोह मुख्य न्यायाधीश के चेंबर में आयोजित किया गया था.
यहां याद दिला दें कि पिछले महीने होली के दौरान न्यायमूर्ति वर्मा के दिल्ली स्थित आवास के बाहरी हिस्से में आग लग गई थी, और इसी दौरान अग्निशमन दल ने नोट बरामदगी का खुलासा किया था. इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद न्यायमूर्ति वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार करते हुए इसे एक साजिश करार दिया था. जांच के बाद 22 मार्च को मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने इस मामले में आंतरिक जांच शुरू की, और इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन न्यायाधीशों के पैनल द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है. इस बीच कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति वर्मा को उनके मूल हाईकोर्ट इलाहाबाद में भेजने की सिफारिश की थी.
वहीं शपथ ग्रहण के खिलाफ लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी. जिसमें कहा गया था कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक न्यायमूर्ति वर्मा को शपथ नहीं दिलाई जानी चाहिए. याचिका की सुनवाई अभी तक सूचीबद्ध नहीं की गई है. अधिवक्ता अशोक पांडेय के माध्यम से दाखिल की गई याचिका में यह दलील दी गई है कि जब सीजेआई ने स्वयं यह कहा है कि न्यायमूर्ति वर्मा को जांच पूरी होने तक कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा जाएगा, तो उन्हें शपथ कैसे दिलाई जा सकती है. इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा 28 मार्च को जारी नोटिफिकेशन भी चुनौती दी गई है, जिसमें न्यायमूर्ति वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की संस्तुति की गई थी. यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायिक कार्यों और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है और अब तक की स्थिति में न्यायमूर्ति वर्मा को किसी प्रकार का न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया है, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती.
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